
घोसी उप चुनाव क्यों होर हा है?
मऊ जिले की घोसी विधान सभा सीट सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद खाली हुई थी। उनके निधन के साथ ही यहां चुनावी हलचल बढ़ गई। अब सभी पार्टियां उपचुनाव से पहले पूरी ताकत लगा रही हैं।
सपा में किसे टिकट मिल सकता है?
सपा सहानुभूति फैक्टर को ध्यान में रख रही है। इसलिए सुधाकर सिंह के बेटे सुजीत सिंह का नाम सबसे आगे है। वे दो बार ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। साथ ही पिता की छवि उन्हें मजबूत आधार दे सकती है।
बीजेपी और सहयोगियों की तैयारियां
बीजेपी गठबंधन में भी टिकट को लेकर कई नाम चर्चा में हैं।
सबसे प्रमुख दावेदार:
- विजय राजभर – जिन्होंने 2019 उपचुनाव में सुधाकर सिंह को हराया था।
- अरविंद राजभर – सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के बेटे।
- बृजेश सिंह – जिनकी हाल में राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है।
इसके अलावा पूर्व सांसद अतुल राय भी सक्रिय बताए जा रहे हैं।
बसपा चुनाव लड़ती है या नहीं, यह समीकरण को और बदल सकता है।
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जातीय समीकरण किसकी मदद करेंगे?
घोसी सीट पर कोई एक जाति निर्णायक भूमिका में नहीं है। यही इस उपचुनाव को और कठिन बनाता है।
मुख्य वोट बैंक:
- मुस्लिम – 1 लाख से अधिक
- दलित – लगभग 70 हजार
- राजभर – लगभग 60 हजार
- यादव – लगभग 50 हजार
- चौहान – करीब 46 हजार
- क्षत्रिय – लगभग 15 हजार
- ब्राह्मण – लगभग 12 हजार
इनमें मुस्लिम, दलित, यादव, राजभर और चौहान समाज चुनाव परिणाम को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं।
कौन जीत की राह पर?
यह सीट हर चुनाव में अलग संदेश देती है।
यहां वोटिंग पैटर्न परिस्थितियों के अनुसार बदलता है। इसलिए किसी भी दल के लिए दो या तीन बड़े सामाजिक समूहों को एकजुट करना जरूरी होगा।
यही जीत की कुंजी बन सकता है।
Short Summary
घोसी विधानसभा उपचुनाव बेहद रोचक बन चुका है।
सपा अपने दिवंगत विधायक के बेटे को टिकट दे सकती है।
वहीं बीजेपी के लिए विजय राजभर सबसे मजबूत नाम माने जा रहे हैं।
जातीय समीकरण और बसपा की रणनीति ही इस उपचुनाव का अंतिम परिणाम तय करेंगे।
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