Saudi Arabia UAE Clash: सऊदी का आरोप है कि उसने यमन के बंदरगाह पर जिस मिलिट्री व्हीकल को तबाह किया उसका इस्तेमाल सऊदी के इलाकों में किया जाना था, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा था.
यमन संकट में नया मोड़
यमन में चल रहा संघर्ष एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सऊदी अरब ने यमन के दक्षिणी हिस्से में स्थित मुकल्ला बंदरगाह पर एयरस्ट्राइक की है। इस हमले में उन सैन्य वाहनों को निशाना बनाया गया, जिनके यूएई से जुड़े होने का दावा किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने पूरे देश में 90 दिनों का आपातकाल घोषित कर दिया है। हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। क्षेत्रीय तनाव भी लगातार बढ़ रहा है।
मुकल्ला बंदरगाह पर क्या हुआ
सैन्य जहाजों पर हमला
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के अनुसार, दो जहाज मुकल्ला बंदरगाह पहुंचे थे।
इन जहाजों में सैन्य वाहन और हथियार मौजूद थे। बताया गया कि यह खेप बिना अनुमति के यमन लाई गई थी।
सऊदी अधिकारियों का कहना है कि यह सामग्री यूएई समर्थित अलगाववादी बलों तक पहुंचाई जा रही थी।
इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया।
इसी आधार पर सऊदी वायुसेना ने सीमित सैन्य कार्रवाई करते हुए जहाजों को निशाना बनाया।
सऊदी अरब का रुख
सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि यह कदम आत्मरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए उठाया गया।
अधिकारियों ने कहा कि किसी भी तरह की अवैध सैन्य आपूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही यूएई से यमन में मौजूद अपने सैन्य बलों को वापस बुलाने की मांग भी की गई।
यमन सरकार का बड़ा फैसला
90 दिनों का आपातकाल
एयरस्ट्राइक के तुरंत बाद यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद ने आपात बैठक की।
बैठक के बाद पूरे देश में 90 दिन का आपातकाल घोषित कर दिया गया।
सरकार का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लिया गया है।
इसके अलावा, यूएई के साथ किया गया संयुक्त रक्षा समझौता भी रद्द कर दिया गया है।
सीमाएं अस्थायी रूप से बंद
यमन सरकार ने 72 घंटों के लिए हवाई अड्डों, बंदरगाहों और जमीनी सीमाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया है।
इस कदम का मकसद स्थिति को नियंत्रण में रखना और किसी भी नई सैन्य गतिविधि को रोकना बताया गया है।
बढ़ता आंतरिक टकराव
अलगाव वादी गुटों की भूमिका
हाल के महीनों में यूएई समर्थित दक्षिणी ट्रांजिशनल काउंसिल ने यमन के कई इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है।
खासतौर पर हदरमौत और अल-महरा प्रांतों में तनाव बढ़ा है।
सऊदी अरब और यमन सरकार इन गतिविधियों को देश की संप्रभुता के खिलाफ मानते हैं।
सरकार की चेतावनी
राष्ट्रपति परिषद के अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी गुट को एकतरफा सैन्य विस्तार की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और केंद्रीय सरकार के अधिकार को स्वीकार करने की अपील की।
यूएई का पक्ष
आरोपों से इनकार
संयुक्त अरब अमीरात ने सऊदी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
यूएई का कहना है कि जिन वाहनों की बात की जा रही है, वे उसकी अपनी सैन्य जरूरतों के लिए थे।
यूएई ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य यमन को अस्थिर करना नहीं है।
तनाव कम करने की अपील
यूएई सरकार ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है।
साथ ही यह भी कहा गया कि क्षेत्रीय सहयोग ही स्थिरता का रास्ता है।
हालांकि, मौजूदा हालात दोनों देशों के रिश्तों में आई खटास को साफ दिखाते हैं।
यमन संघर्ष पर असर
बिखरता गठबंधन
यह घटनाक्रम दिखाता है कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ बना गठबंधन अब अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है।
एक ओर सऊदी अरब यमन की केंद्रीय सरकार का समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यूएई कुछ स्थानीय गुटों के साथ खड़ा नजर आता है।
आगे क्या
फिलहाल यमन की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। आपातकाल, सैन्य तनाव और कूटनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों की दिशा तय करेंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात नहीं संभले, तो शांति प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है।
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