
बाबरी मस्जिद बंगाल विवाद : Humayun Kabir के बयान से बढ़ा तनाव
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक कार्यक्रम के दौरान सस्पेंडेड TMC विधायक Humayun Kabir ने बाबरी मस्जिद जैसी संरचना की नींव रखी। इसी मंच पर उन्होंने बयान दिया कि बंगाल में “37 प्रतिशत मुस्लिम आबादी” है और यह समुदाय मिलकर इस मस्जिद का निर्माण करेगा। जैसे ही यह बयान सामने आया, राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
कबीर का यह कदम 6 दिसंबर के दिन उठाया गया, जिसे बाबरी मस्जिद गिराए जाने की बरसी के रूप में जाना जाता है। इस वजह से मामला और भी संवेदनशील हो गया।
TMC ने लिया बड़ा एक्शन
Humayun Kabir के बयान और उनके कदम पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए TMC ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया।
पार्टी ने कहा कि उनका बयान और कार्यक्रम “सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला कदम” था।
TMC ने खुद को इस पूरी गतिविधि से दूर कर लिया और इसे निजी राजनीतिक एजेंडा बताया।
कहा गया कि पार्टी किसी भी ऐसे काम का समर्थन नहीं करती जो सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुँचा सकता हो।
Humayun Kabir कादावा— “मुस्लिम समुदाय खुद बनाएगा मस्जिद”
कबीर ने कहा कि मस्जिद बनाने के लिए पैसे की कमी नहीं होगी और मुस्लिम समाज इसे अपनी भागीदारी से पूरा करेगा।
उन्होंने दावा किया कि यह केवल मस्जिद का ढांचा नहीं होगा बल्कि इसके साथ—
- हॉस्पिटल
- गेस्ट हाउस
- कम्युनिटी हॉल
जैसी सुविधाएँ भी जोड़ी जाएँगी।
उनका कहना था कि यह केवल धार्मिक प्रोजेक्ट नहीं बल्कि सामाजिक विकास का प्रयास है।
राजनीतिक तापमान क्यों बढ़ा ?
यह विवाद कई वजहों से तेजी से भड़का:
- बाबरी मुद्दा भारत के सबसे संवेदनशील मामलों में से एक
- 6 दिसंबर की तारीख बेहद प्रतीकात्मक
- बंगाल में मुस्लिम आबादी के जिक्र से राजनीतिक ध्रुवीकरण की आशंका
- विपक्ष ने इसे “वोट बैंक राजनीति” बताया
- प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था की चुनौती
कई राजनीतिक नेताओं ने कहा कि इस बयान से धार्मिक टकराव भड़क सकता है, इसलिए सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहना होगा।
क्या हो सकता है आगे ?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- यह विवाद आने वाले चुनावों में मुद्दा बन सकता है
- TMC और Kabir के बीच राजनीतिक दूरी और बढ़ेगी
- विपक्ष इस मामले को चुनावी मंचों पर उछालेगा
- प्रशासन पर शांति बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा
यह मामला केवल धार्मिक ढाँचे तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल की राजनीति का माहौल बदलने की क्षमता रखता है।
निष्कर्ष
बाबरी मस्जिद बंगाल विवाद, Humayun Kabir का बयान और TMC की कार्रवाई — ये तीनों मिलकर एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में बदल चुके हैं। यह विवाद आने वाले समय में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकता है।