मऊ में 23 जनवरी को बजेगा सायरन, सुभाष चंद्र बोस जयंती पर होगा सिविल सुरक्षा मॉक ड्रिल


23 जनवरी को ब्लैकआउट और आपदा अभ्यास की पूरी तैयारी

मऊ।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर मऊ जिले में सिविल सुरक्षा मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। यह अभ्यास 23 जनवरी को शाम 6 बजे किया जाएगा। इसका उद्देश्य आम लोगों और प्रशासन को आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार करना है।

इस संबंध में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला प्रशासन की ओर से एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में मॉक ड्रिल की रूपरेखा, जिम्मेदारियां और आवश्यक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।


मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य

आम जनता को आपदा से निपटने की ट्रेनिंग

इस मॉक ड्रिल का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। अचानक होने वाली आपदाओं में घबराहट न हो, इसके लिए यह अभ्यास जरूरी माना गया है।

ड्रिल के दौरान ब्लैकआउट किया जाएगा। यानी तय समय पर लाइटें बंद की जाएंगी। इसके साथ ही सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया जाएगा।

विभागों के बीच बेहतर तालमेल

मॉक ड्रिल में कई विभाग मिलकर काम करेंगे। इनमें पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन टीम और स्वयंसेवी संगठन शामिल रहेंगे।

इससे यह देखा जाएगा कि सभी विभाग आपात स्थिति में कितनी तेजी और सही तरीके से काम करते हैं।


प्रशासन की बैठक और दिशा-निर्देश

जिलाधिकारी ने दिए स्पष्ट निर्देश

बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी ने की। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल को पूरी गंभीरता से लिया जाए। सभी विभाग समय पर अपनी तैयारियां पूरी करें।

उन्होंने निर्देश दिए कि अभ्यास के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही न हो। लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि रहे।

अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

बैठक में अपर जिलाधिकारी, एसडीएम, शिक्षा विभाग, सूचना विभाग और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सभी को उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से बताई गईं।

हर विभाग को अपना अलग कार्य-योजना तैयार करने को कहा गया।


मॉक ड्रिल के दौरान क्या-क्या होगा

शाम 6 बजे बजेगा सायरन

23 जनवरी को शाम ठीक 6 बजे सायरन बजेगा। इसके साथ ही मॉक ड्रिल की शुरुआत होगी।

  • कुछ समय के लिए ब्लैकआउट रहेगा
  • लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने का अभ्यास करेंगे
  • प्रशासन हालात का जायजा लेगा

इस दौरान लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

आग और प्राथमिक उपचार का अभ्यास

ड्रिल में आग लगने की स्थिति का भी अभ्यास किया जाएगा।

  • फायर ब्रिगेड आग बुझाने का प्रदर्शन करेगी
  • प्राथमिक उपचार की जानकारी दी जाएगी
  • घायल व्यक्ति को कैसे सुरक्षित मदद दी जाए, यह बताया जाएगा

इससे लोगों को वास्तविक हालात में सही कदम उठाने की सीख मिलेगी।


नागरिकों को क्या करना होगा

घबराएं नहीं, सहयोग करें

प्रशासन ने साफ किया है कि यह केवल अभ्यास है। लोगों से अपील की गई है कि वे घबराएं नहीं।

ड्रिल के दौरान:

  • अफवाहों पर ध्यान न दें
  • प्रशासन के निर्देशों का पालन करें
  • बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें

सहयोग से ही यह अभ्यास सफल हो सकेगा।

स्वयंसेवकों की भी रहेगी भूमिका

ड्रिल में प्रशिक्षित स्वयंसेवक भी मौजूद रहेंगे। वे लोगों को सही दिशा में मार्गदर्शन देंगे।

इससे आम जनता को आपदा प्रबंधन की बुनियादी जानकारी मिलेगी।


क्यों जरूरी है मॉक ड्रिल

आपदाएं बिना सूचना के आ सकती हैं। ऐसे में तैयारी बहुत जरूरी है। मॉक ड्रिल से यह पता चलता है कि:

  • प्रशासन कितना तैयार है
  • आम लोग कैसे प्रतिक्रिया देते हैं
  • किन जगहों पर सुधार की जरूरत है

जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे अभ्यास भविष्य में जान बचाने में मददगार साबित होते हैं।


निष्कर्ष

सुभाष चंद्र बोस जयंती पर मऊ जिले में होने वाला यह सिविल सुरक्षा मॉक ड्रिल एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रशासन और जनता दोनों को सीख मिलेगी।

अगर सभी लोग सहयोग करें, तो आपात स्थिति में नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस अभ्यास को गंभीरता से लें और सक्रिय भागीदारी करें।

2 thoughts on “मऊ में 23 जनवरी को बजेगा सायरन, सुभाष चंद्र बोस जयंती पर होगा सिविल सुरक्षा मॉक ड्रिल”

Leave a Comment