वाराणसी: दालमंडी चौड़ीकरण अभियान ने पकड़ी रफ्तार
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश के बाद वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित चौड़ीकरण परियोजना पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार को नई सड़क से दालमंडी की ओर जाने वाली गली के मुहाने पर स्थित तीन मंजिला भवन C-1/24 को ध्वस्त किया गया। यह पहली बार है जब इस अभियान में बुलडोजर का प्रयोग हुआ।
वीडीए ने इस भवन को अवैध घोषित किया था। मकान मुख्तार अहमद खान के नाम दर्ज बताया गया है।
अब तक 10 भवन ध्वस्त, 50 रजिस्ट्री का लक्ष्य
इस कार्रवाई के साथ अब तक कुल 10 भवन ध्वस्त किए जा चुके हैं।
वहीं 25 से अधिक लोगों ने रजिस्ट्री करा ली है, जबकि 20 से ज्यादा लोग रजिस्ट्री प्रक्रिया में हैं।
दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना की कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन के.के. सिंह ने बताया कि इस सप्ताह तक 50 रजिस्ट्री पूरी होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि परियोजना के दायरे में कुल 181 भवन चिन्हित हैं और तय समय में काम पूरा किया जाएगा।
चौड़ीकरण की जद में 6 मस्जिदें
दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना में छह मस्जिदें सीधे प्रभावित हो रही हैं। इनमें शामिल हैं—
- करिमुल्ला बेग मस्जिद
- संगेमरमर मस्जिद
- अली रज़ा मस्जिद
- रंगीले शाह मस्जिद
- निसारन मस्जिद
- लंगड़े हाफिज मस्जिद
चौक से दालमंडी की ओर जाते समय करिमुल्ला बेग मस्जिद, जबकि नई सड़क से चौक की तरफ लंगड़े हाफिज मस्जिद मुहाने पर स्थित है।
ऐसे में इन मस्जिदों को शिफ्ट किए बिना परियोजना का पूरा होना मुश्किल माना जा रहा है।

प्रशासन का बयान: ऊपर से निर्देश के बाद होगा फैसला
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन के.के. सिंह ने बताया कि वाराणसी में पांच अलग-अलग स्थानों पर चौड़ीकरण कार्य चल रहा है और अब तक किसी धार्मिक स्थल को लेकर कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया है।
उन्होंने कहा,
“संवेदनशील मामलों में हम उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराते हैं।
मस्जिदों के एलाइनमेंट या विस्थापन पर फैसला ऊपर से निर्देश मिलने के बाद ही होगा।”
मस्जिदों के विस्थापन के लिए जमीन की तलाश
प्रशासन का कहना है कि यदि सरकारी जमीन उपलब्ध होती है, तो मस्जिदों को वहां शिफ्ट किया जाएगा।
इसके अलावा निजी व्यक्ति द्वारा जमीन देने की स्थिति में भी विकल्प खुले हैं। हालांकि अंतिम निर्णय शासन स्तर से होगा।
इंतेजामिया कमेटी का साफ इनकार
इस पूरे मामले पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने कड़ा रुख अपनाया है।
कमेटी के जॉइंट सेक्रेटरी मोहम्मद यासीन ने स्पष्ट कहा—
“प्रशासन बुलडोजर चलाकर दबाव बनाना चाहता है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं।
किसी भी कीमत पर अपनी मस्जिदें नहीं देंगे।”
उन्होंने बताया कि लंगड़े हाफिज और निसारन मस्जिद पर कोर्ट का स्टे है और कमेटी किसी भी हालत में मस्जिद शिफ्ट करने को तैयार नहीं है।
टकराव के संकेत, समाधान पर टिकी निगाहें
दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना जहां यातायात सुधार के लिहाज से अहम मानी जा रही है,
वहीं मस्जिदों को लेकर खड़ा हुआ विवाद इसे संवेदनशील मोड़ पर ले आया है।
अब सभी की निगाहें शासन और प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हैं।
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