मऊ में उभरा आक्रोश, सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर कथित अत्याचारों के विरोध में मऊ में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर नाराजगी जाहिर की और केंद्र सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा खतरे में है।ऐसे में भारत सरकार को चुप नहीं रहना चाहिए।
बांग्लादेश सरकार का पुतला दहन
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश सरकार का पुतला दहन किया।इस दौरान नारेबाजी भी की गई।
प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन आक्रोश साफ नजर आया।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि अत्याचार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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प्रमुख मांगों को लेकर उठी आवाज
प्रदर्शन कर रहे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कई मांगें रखीं।
उन्होंने कहा कि जब तक बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक भारत को कड़ा रुख अपनाना चाहिए।
कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं:
- भारत और बांग्लादेश के बीच सभी व्यापारिक संबंधों पर पुनर्विचार
- बांग्लादेश को दी जा रही बिजली आपूर्ति रोकने की मांग
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाने की अपील
- केंद्र सरकार द्वारा स्पष्ट और प्रभावी विदेश नीति
कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह केवल राजनीति का विषय नहीं, बल्कि मानवता का सवाल है।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन स्थानीय प्रशासन के माध्यम से भेजा गया।
इसमें बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही घटनाओं का उल्लेख किया गया।
साथ ही केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
स्थानीय नेताओं ने सरकार पर उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी के जिला पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया बेहद कमजोर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
केवल कूटनीति नहीं, बल्कि पीड़ित समुदाय की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रदेश में बढ़ रहा विरोध
मऊ के अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इसी मुद्दे को लेकर विरोध दर्ज कराया जा चुका है।
विभिन्न राजनीतिक संगठनों और सामाजिक समूहों ने चिंता जताई है।
इन प्रदर्शनों से साफ है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर देशभर में बेचैनी बढ़ रही है।
जनता चाहती है कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट और मजबूत निर्णय ले।
निष्कर्ष
मऊ में हुआ यह प्रदर्शन बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ एक सशक्त संदेश बनकर सामने आया है।
आम आदमी पार्टी ने साफ किया है कि यह मुद्दा केवल एक दिन का नहीं है।
यदि जरूरत पड़ी, तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।
अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।
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