मऊ में पेयजल पाइपलाइन संकट: 35 प्रतिशत लाइनें जर्जर, हर माह 150 लीकेज शिकायतें


नगर में पेयजल व्यवस्था पर बढ़ता दबाव

मऊ नगर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। नगर पालिका के अनुसार शहर की लगभग 35 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइन जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी हैं। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है।

हर महीने औसतन 150 लीकेज की शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। इनकी मरम्मत में नगर पालिका को हर माह करीब तीन लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं।


पुरानी पाइपलाइन बनी बड़ी समस्या

कई दशक पुरानी लाइनें

नगर क्षेत्र में बिछी पाइपलाइन का बड़ा हिस्सा कई दशक पुराना है।

कई इलाकों में अभी भी सीमेंट की पाइपलाइन इस्तेमाल में है, जो समय के साथ कमजोर हो चुकी है।

भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क खुदाई के कारण पाइपलाइन बार-बार टूट रही है।

हर दिन आती हैं शिकायतें

जलकल विभाग के अनुसार रोजाना औसतन चार से पांच लीकेज की शिकायतें मिलती हैं।

इन्हीं शिकायतों को मिलाकर महीने में यह संख्या 150 के आसपास पहुंच जाती है।

कर्मचारियों को लगातार मरम्मत कार्य में लगाया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।


मरम्मत पर बढ़ता खर्च

हर माह लाखों रुपये खर्च

लीकेज की मरम्मत, मजदूरी और सामग्री पर नगर पालिका को हर माह लगभग तीन से चार लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

इसके बावजूद पानी की बर्बादी पूरी तरह नहीं रुक पा रही है।

राजस्व के बावजूद परेशानी

नगर पालिका जल कर के रूप में हर महीने लगभग दस लाख रुपये तक राजस्व वसूल करती है।

फिर भी बार-बार होने वाली मरम्मत के कारण बजट पर दबाव बना रहता है।

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कई इलाकों में पानी की किल्लत

प्रभावित मोहल्ले

पेयजल पाइपलाइन लीकेज की समस्या खास तौर पर परदहा, बकवल, भीटी और सदर बाजार जैसे इलाकों में ज्यादा है।

इन क्षेत्रों में पाइपलाइन नालों के किनारे या सड़कों के नीचे से गुजरती है, जिससे टूट-फूट की संभावना बढ़ जाती है।

लोगों की परेशानी

इन इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।

कई जगहों पर घंटों तक पानी नहीं आता, तो कहीं कम दबाव के कारण ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं पहुंच पाता।


आपूर्ति और मांग में बड़ा अंतर

जरूरत ज्यादा, आपूर्ति कम

नगर को रोजाना लगभग 290 एमएलडी पानी की जरूरत होती है।

लेकिन वर्तमान व्यवस्था के तहत केवल 170 एमएलडी पानी ही लोगों तक पहुंच पा रहा है।

लीकेज बना मुख्य कारण

पानी की इस कमी का सबसे बड़ा कारण लीकेज और पुरानी पाइपलाइन है।

टूटे पाइपों से बड़ी मात्रा में पानी बह जाता है, जिससे सप्लाई प्रभावित होती है।


पाइपलाइन बदलने की तैयारी

नई योजना पर काम

नगर पालिका ने पुरानी मुख्य पाइपलाइन को बदलने की योजना बनाई है।

इसके लिए करीब 45 लाख रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है।

सर्वे प्रक्रिया शुरू

अधिकारियों के अनुसार धीरे-धीरे वार्ड-वार सर्वे किया जा रहा है।

पुरानी और कमजोर पाइपलाइन को हटाकर नई लाइन बिछाने की तैयारी की जा रही है।


निष्कर्ष

मऊ नगर में पेयजल पाइपलाइन की स्थिति गंभीर होती जा रही है।

जर्जर लाइनें, लगातार लीकेज और बढ़ता मरम्मत खर्च नगर पालिका के लिए चुनौती बन चुका है।

अगर समय रहते पुरानी पाइपलाइन नहीं बदली गई, तो आने वाले दिनों में पानी की समस्या और गहरी हो सकती है।

लोगों को उम्मीद है कि प्रस्तावित योजना से जल्द राहत मिलेगी और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था सुधरेगी।



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