मऊ के गांव से असम तक — IG अखिलेश कुमार सिंह को दो राष्ट्रीय पुरस्कार, घर में खुशी की लहर

MAU News: असम पुलिस के आईजी अखिलेश कुमार सिंह को राष्ट्रीय एकता दिवस पर केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक 2025 और मणिपुर डीजीपी प्रशंसा पदक 2025 से सम्मानित किया गया है।

IG अखिलेश कुमार सिंह


असम पुलिस के IG अखिलेश कुमार सिंह को इस वर्ष दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

एक पुलिस अधिकारी के लिए इससे बड़ा क्षण शायद ही कोई होता है,

क्योंकि ये पुरस्कार केवल उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि असाधारण संवेदनशीलता और ज़िम्मेदारी के लिए दिए जाते हैं।

यही कारण है कि जब यह खबर उनके गृह जिले मऊ पहुंची, तो जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। गाँव से लेकर शहर तक लोग गर्व महसूस कर रहे हैं।

परिवार, परिचित और स्थानीय लोग उनके संघर्षों और उपलब्धियों को याद कर उन्हें बधाइयाँ दे रहे हैं।

डायन-शिकार मामले में मिला राष्ट्रीय सम्मान

पहला सम्मान उन्हें उस बेहद संवेदनशील मामले में मिला, जिसमें एक महिला को डायन बताकर उसे जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी।

यह घटना समाज के एक दुखद और कड़वे सच को दर्शाती है, जहाँ अंधविश्वास आज भी कमजोर और गरीब लोगों को निशाना बनाता है।

इस घटना की जानकारी मिलते ही IG अखिलेश कुमार सिंह ने तेजी से कार्रवाई की।


उन्होंने घटना को हल्के में नहीं लिया। उन्होंने तुरंत पुलिस टीमों को सक्रिय किया और संबंधित क्षेत्र में पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में लिया।

इसी तुरंत कार्रवाई के कारण पीड़ित महिला को सुरक्षित बचाया जा सका।

घटना के बाद जांच की प्रक्रिया बेहद सख्त और निष्पक्ष तरीके से हुई। सबूत इकट्ठा किए गए। गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

आरोपियों की पहचान की गई और कानून के दायरे में लाते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया।


अखिलेश कुमार सिंह की निगरानी में तैयार चार्जशीट मजबूत थी।

इस वजह से अदालत ने 23 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

यह फैसला कई मायनों में ऐतिहासिक है।


इस निर्णय ने समाज में एक स्पष्ट संदेश दिया—अंधविश्वास के नाम पर अपराध करने वालों को कठोर सजा मिलेगी।

यह न्याय केवल पीड़िता के लिए नहीं था, बल्कि उन सभी लोगों के लिए था, जो ऐसी घटनाओं से डर और सदमे में रहते हैं।


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मणिपुर में शांति बहाली का बड़ा योगदान

अखिलेश कुमार सिंह को मिला दूसरा सम्मान मणिपुर में शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए दिया गया है।

वर्ष 2023 में मणिपुर ने हिंसा की गंभीर स्थितियों का सामना किया था।

जातीय तनाव बढ़ गया था और कई परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा था।

व्यवस्था चुनौतीपूर्ण थी और सुरक्षा बलों पर जिम्मेदारियों का दबाव लगातार बढ़ रहा था।

इसी कठिन समय में अखिलेश कुमार सिंह को मणिपुर भेजा गया।

उन्होंने स्थिति का आकलन किया और तुरंत अपनी रणनीति लागू की।

असम के कई लोग मणिपुर में फंसे हुए थे, जिन्हें सुरक्षित वापस लाना आवश्यक था।

IG अखिलेश कुमार सिंह ने इस काम को अपनी प्राथमिकता बनाया और कई टीमों की मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।

इसके साथ ही, उन्होंने करीब दो हजार जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिलवाया, जो आगे जाकर शांति स्थापित करने में निर्णायक साबित हुआ। उनका नेतृत्व शांत, संतुलित और सटीक रहा।


मणिपुर की स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आई और इसमें उनकी भूमिका अहम मानी जाती है।

यही कारण है कि उन्हें मणिपुर DGP प्रशंसा पदक से सम्मानित किया गया।

मऊ का बेटा—संघर्ष, परिश्रम और सफलता का प्रेरक सफर

अखिलेश कुमार सिंह का जीवन सफर भी उतना ही प्रेरक है, जितना उनका कार्य।

वह मऊ जिले के एक छोटे से गाँव से आते हैं। वहीं से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की।

परिवार के संसाधन सीमित थे, लेकिन सपनों में कोई कमी नहीं थी।


इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की।

फिर उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की।

यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उनके धैर्य ने उन्हें 2003 में IPS अधिकारी बना दिया।

आज उनका नाम सिर्फ असम या यूपी में ही नहीं, देश की पुलिस सेवा में भी एक मिसाल के रूप में लिया जाता है।

उनकी सफलता ने मऊ के युवाओं को प्रेरित किया है।

लोग कहते हैं कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी सरलता, ईमानदारी और जिम्मेदारी है।

जिले में खुशी की लहर और गर्व की भावना

उनके सम्मानित होने के बाद पूरे जिले में एक उत्साह का माहौल है।

घर-परिवार में मिठाइयाँ बाँटी जा रही हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि वे हमेशा से शांत स्वभाव के रहे हैं और कभी भी अपने पद का घमंड नहीं दिखाया।
उनकी उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा जिला गौरवान्वित है।

यह एक ऐसी कहानी है जो बताती है कि मेहनत, ईमानदारी और समर्पण के साथ कोई भी व्यक्ति ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।

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