सीरीज हार के बाद गंभीर का बड़ा बयान: ‘मेरे भविष्य का फैसला BCCI करेगा’


कहामत भूलिए, मैंने ही इंग्लैंड में नतीजे दिए और चैंपियंसट्रॉफी जिताई थी

भारत को गुवाहाटी टेस्ट में साउथ अफ्रीका के हाथों 408 रनों की शर्मनाक हार क्या मिली, भारतीय क्रिकेट गलियारों में भूचाल सा आ गया।

रनों के हिसाब से यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी टेस्ट हार है।

पिछले 13 महीनों में दूसरी बार टीम इंडिया घरेलू मैदान पर क्लीन स्वीप हुई है—और इस बार निशाने पर सीधे कोच गौतम गंभीर हैं।

हार के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने कहा—

“जिम्मेदारी सबसे पहले मेरी है। मैंने कभी किसी खिलाड़ी को दोष नहीं दियाऔर न आगे दूंगा।

मेरे भविष्य का फैसला BCCI करेगा।और हां… मत भूलिए, इंग्लैंड में नतीजे मैंने ही दिलाए और चैंपियंसट्रॉफी मैं ही जिताने वाला कोच था।

टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर बुधवार को पोस्ट मैच कॉन्फ्रेंस में आए।


टीम इंडिया का 13 महीनों में दूसरा क्लीन स्वीप – आंकड़े चौंकाने वाले

गंभीर जुलाई 2024 में हेड कोच बने और तभी से टीम में बदलावों की लाइन लगी रही। नतीजा—19 में से 10 टेस्ट में हार।
न्यूजीलैंड ने पिछले साल 3-0 से धोया, अब साउथ अफ्रीका ने 2-0 से।

विशेषज्ञ खिलाड़ियों को हटाकर ऑलराउंडर्स पर भरोसा… और वही अब गंभीर की कोचिंग की सबसे बड़ी आलोचना बन गई।


कुंबले और प्रसाद के तीखे बयान – कोचिंग पर सीधे सवाल

1️⃣अनिल कुंबले: “इतने बदला वटेस्ट क्रिकेट मेंन हींच लते”

कुंबले ने टीम में लगातार हो रहे प्रयोगों पर नाराजगी जताते हुए कहा—

“इतने ऑलराउंडर, इतने बदलाव… यह टेस्ट क्रिकेट की मेंटैलिटी नहीं है। टीम को स्थिरता चाहिए।”

2️⃣वेंकटेश प्रसाद का हमला: “ऑलराउंडर्स का जुनून टीम कोबर्बाद कर रहा”

प्रसाद ने सोशल मीडिया पर लिखा—

रणनीति खराब, स्किल खराब, बॉडी लैंग्वेज खराब… दो घरेलू सीरीज में व्हाइटवॉश! उम्मीद है बात यूं ही धुल नहीं जाएगी।

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गंभीर की कोचिंग पर उठे सवालों की 4 बड़ी वजहें

1. सिर्फ 3 स्पेशलिस्ट बैटर – और टेस्ट में लड़खड़ाई बल्लेबाजी

भारत ने दोनों टेस्ट में सिर्फ तीन स्पेशलिस्ट बैटर खिलाए, और बाकी जिम्मेदारी ऑलराउंडर्स पर डाल दी।
नतीजा—ऊपरी क्रम ने कुछ कोशिश की, लेकिन 4 से 7 नंबर तक बैटिंग बिखरती गई।

2. बैटिंग ऑर्डर में एक्सपेरिमेंट पर एक्सपेरिमेंट

नंबर-3 की जगह कभी सुंदर, कभी सुदर्शन, कभी करुण नायर।
जहां पहले द्रविड़ और फिर पुजारा ने 25 साल तक क्लास दिखाई, अब वहां अनिश्चितता ही अनिश्चितता है।

3. स्ट्राइक फिंगर स्पिनर की कमी – अश्विन के बाद खालीपन साफ

अश्विन के रिटायरमेंट के बाद जडेजा अकेले पड़ गए।
सुंदर और अक्षर जैसे ऑलराउंडर्स में विकेट लेने वाला ‘X-फैक्टर’ नहीं दिख रहा।
डोमेस्टिक के स्ट्राइक स्पिनर साई किशोर, सौरभ कुमार को मौका तक नहीं मिल पा रहा।

4. ऑलराउंडर्स पर ओवरडिपेंडेंस – परफॉर्मेंस बेदम

सुंदर, अक्षर, जडेजा, नीतीश रेड्डी—लगातार खिलाए जा रहे हैं, पर टेस्ट में असर कम।
नीतीश रेड्डी की सिलेक्शन पर तो सबसे ज्यादा सवाल—न रन, न खास बॉलिंग।


क्या गंभीर की कुर्सी खतरे में?

सवाल बड़ा है।गंभीर ने खुद कहा कि फैसला BCCI करेगा, और यह बयान साफ इशारा है कि अंदरखाने दबाव बढ़ चुका है।
घरेलू जमीन पर लगातार दो क्लीन स्वीप… भारतीय क्रिकेट में यह बेहद दुर्लभ और चिंताजनक है।

आने वाले दिनों में बोर्ड क्या निर्णय लेता है, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन इतना तय है—भारत की यह हार सिर्फ एक हार नहीं, बल्कि वो अलार्म है जिसने टीम मैनेजमेंट और कोचिंग स्ट्रक्चर दोनों पर गहरा सवाल खड़ा किया है।

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